UPI MDR 15 अक्टूबर से: सर्वे में 83% कारोबारी 0.4% फ़ीस उठाने को तैयार नहीं
दुकानदार की यह फ़ीस ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर है, ज़्यादा से ज़्यादा ₹300; ग्राहक से माँगी गई तो सर्वे में सिर्फ़ 14% ने कहा कि वे भरकर भी UPI से पेमेंट करेंगे।
3 लाइन में वजह।
- क्या हुआ:
- 15 अक्टूबर 2026 से दुकान पर ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर दुकानदार को 0.4% फ़ीस (MDR) देनी होगी, ज़्यादा से ज़्यादा ₹300। छोटे दुकानदार और दोस्तों-रिश्तेदारों को भेजा पैसा इससे बाहर है।
- क्यों:
- NPCI के मुताबिक़ उद्योग के अनुमान से UPI चलाने पर सालाना क़रीब ₹20,000 करोड़ लगते हैं और इसके लिए कमाई का मॉडल चाहिए। अगस्त में क़ानून बदला, जिसके बाद UPI पर यह फ़ीस लेना मुमकिन हुआ।
- आप पर असर:
- ₹2,000 तक के पेमेंट पर कुछ नहीं बदला। उससे ऊपर सरकार ने बैंकों से कहा है कि दुकानदार फ़ीस ग्राहक पर न डालें, पर ग्राहक से फ़ीस वसूलने पर जुर्माना या पैसा लौटाने का तरीक़ा अभी नहीं बताया गया।
दुकान पर ₹2,000 से ऊपर का UPI पेमेंट लेने पर अब दुकानदार को फ़ीस देनी होगी, छोटे दुकानदारों को छोड़कर। यह फ़ीस 15 अक्टूबर से लगेगी, और सरकार का कहना है कि इसे ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा।
इस फ़ीस को MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) कहते हैं। डिजिटल पेमेंट लेने के बदले दुकान यह पैसा बैंकों, पेमेंट गेटवे और UPI ऐप को देती है। रेट 0.4% है, यानी हर ₹100 पर 40 पैसे।
सर्वे संस्था LocalCircles के मुताबिक़ सिर्फ़ 17% कारोबारी 0.4% या उससे ज़्यादा फ़ीस उठाने को राज़ी हैं, बाक़ी 83% नहीं। हालाँकि इन 83% में वे कारोबार भी गिने गए हैं जो UPI से पेमेंट लेते ही नहीं। ग्राहकों के सर्वे में 14% ने ही कहा कि दुकानदार ऊपर से फ़ीस माँगे, तब भी वे उसे भरकर UPI से पेमेंट करेंगे।
किस पेमेंट पर कितनी फ़ीस?
NPCI ने 15 सितंबर को फ़ीस का ढाँचा जारी किया। नीचे का हिसाब हमने उसी के रेट से लगाया है। ये रक़में दुकान या कंपनी भरेगी; सरकार के मुताबिक़ ग्राहक के बिल में कुछ नहीं जुड़ेगा।
आपका पेमेंट | दुकान या कंपनी की फ़ीस |
|---|---|
₹2,000 तक (ठीक ₹2,000 भी) | ₹0 |
₹3,000 | ₹12 |
₹10,000 | ₹40 |
₹50,000 | ₹200 |
₹75,000 या उससे ज़्यादा | ₹300 (इससे ऊपर नहीं) |
₹3,000 का पेट्रोल, रेल टिकट, बीमा, टेलीकॉम बिल या खेती का सामान | ₹5 |
म्यूचुअल फ़ंड में ₹10,000 | ₹2 (0.02%) |
छोटी दुकान के QR पर ₹5,000 | ₹0 |
दोस्त या रिश्तेदार को ₹50,000 | ₹0 |
₹3,000 से ₹75,000 वाली लाइनें उन दुकानों की हैं जो छूट में नहीं आतीं। फ़ीस ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर है, इसलिए ठीक ₹2,000 पर ₹8 नहीं, ₹0 लगेगा।
छोटे दुकानदार, जिन्हें QR कोड से महीने में ₹1 लाख तक UPI पेमेंट मिलते हैं, कोई फ़ीस नहीं देंगे, भले कोई एक पेमेंट ₹2,000 से बड़ा हो। ₹5 की फ़्लैट फ़ीस ज़रूरी क्षेत्रों के लिए है, जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और खेती का सामान।
आप पर असर
किराने का ₹1,800 का बिल UPI से भरा, तो कोई फ़ीस नहीं, क्योंकि रक़म ₹2,000 से कम है।
किसी बड़े शोरूम से ₹25,000 का फ़ोन UPI से लिया, तो 0.4% के हिसाब से शोरूम को ₹100 देने होंगे। नियम में यह शोरूम का ख़र्च है, आपका नहीं।
सर्वे के 83% और 86% में कौन-कौन गिना गया?
LocalCircles का दुकानदारों वाला सर्वे 16 सितंबर को आया। इसमें 242 ज़िलों के कारोबारियों से पूछा गया कि ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर वे ज़्यादा से ज़्यादा कितनी MDR उठा सकते हैं। इसके 32,796 जवाब ऐसे बँटे:
जवाब | हिस्सा |
|---|---|
कोई फ़ीस नहीं उठाएँगे | 41% |
UPI से पेमेंट लेते ही नहीं | 9% |
कुछ फ़ीस, पर 0.4% से कम (चार विकल्प मिलाकर) | 33% |
0.4% या उससे ज़्यादा उठा लेंगे | 17% |
यानी 83% में वे 9% भी हैं जो UPI लेते ही नहीं, और वे 33% भी जो कुछ फ़ीस उठाने को तैयार हैं, बस 0.4% जितनी नहीं।
ग्राहकों वाला सर्वे 4 अक्टूबर को आया, जिसमें 291 ज़िलों के UPI यूज़र्स ने जवाब दिए। सवाल था कि ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर दुकानदार UPI के लिए अलग से पैसे माँगे, तो आप क्या करेंगे। इसके 31,206 जवाबों में 27% ने कैश चुना, 26% ने क्रेडिट कार्ड, 14% ने डेबिट कार्ड और 4% ने बैंक ट्रांसफ़र। 2% ख़रीद ही टाल देंगे। फ़ीस भरकर UPI पर टिके रहने की बात सिर्फ़ 14% ने कही।
LocalCircles ने अपनी रिलीज़ में जो 86% बताया है, वह इसी से निकला है: 100 में से ये 14 घटाकर। पर इसमें वे 9% भी हैं जो दुकानदार से कोई और रास्ता पूछेंगे, और 4% जो कुछ कह नहीं पाए। सवाल भी उस हालत का था जब दुकानदार फ़ीस ग्राहक से माँगे, जबकि नियम में यह फ़ीस दुकानदार भरता है।
LocalCircles के मुताबिक़ दोनों सर्वे उसके अपने प्लेटफ़ॉर्म पर हुए, और जवाब सिर्फ़ रजिस्टर्ड, वेरिफ़ाइड यूज़र्स ने दिए। ये जवाब किन तारीख़ों में लिए गए, यह पेजों पर नहीं लिखा।
दुकानदार ऊपर से पैसे माँगे तो?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने PTI से बातचीत में कहा कि यह फ़ीस ग्राहकों पर नहीं डाली जाएगी। उनके मुताबिक़ यह न टैक्स है, न सेस, न सरचार्ज, और इसका पैसा सरकारी ख़ज़ाने में नहीं जाता।
सरकार ने यह बात लिखकर भी कही है। वित्त मंत्रालय की PIB रिलीज़ के मुताबिक़ बैंकों से कहा गया है कि वे पक्का करें कि दुकानदार MDR ग्राहक पर न डालें। PTI ने 18 सितंबर को बताया कि मंत्रालय इस पर निगरानी का तरीक़ा सोच रहा है। 24 सितंबर की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) बैंकों के ज़रिए दुकानदारों पर नज़र रखने की व्यवस्था बनाएगा।
पर नियम तोड़ने वाले दुकानदार का क्या होगा, यह साफ़ नहीं। LocalCircles ने 4 अक्टूबर की रिलीज़ में लिखा है कि ढाँचे में अभी न ऐसे दुकानदार पर जुर्माने की बात है, न उस ग्राहक को पैसा लौटाने का रास्ता, जिससे ग़लत तरीक़े से फ़ीस ली गई। Outlook India के मुताबिक़ इस पर अमल मुश्किल हो सकता है, क्योंकि सामान की क़ीमत दुकानदार ख़ुद तय करता है। वह फ़ीस ख़ुद उठा सकता है, क़ीमत में जोड़ सकता है, या ग्राहकों को कैश की तरफ़ मोड़ सकता है।
96% पेमेंट मुफ़्त, फिर भी विरोध क्यों?
वित्त मंत्रालय की PIB रिलीज़ के मुताबिक़ दुकानों पर होने वाले क़रीब 96% UPI पेमेंट पर फ़ीस नहीं लगेगी, क्योंकि वे ₹2,000 तक के हैं या छोटे दुकानदारों के। पर रक़म के हिसाब से तस्वीर उलटी है।
LocalCircles के मुताबिक़ ₹2,000 से बड़े पेमेंट गिनती में 5% से कम हैं, पर दुकानों को UPI से मिलने वाली रक़म का 67% इन्हीं से आता है। यह क़रीब ₹6 लाख करोड़ महीना है।
NPCI ने फ़ीस की वजह UPI चलाने का ख़र्च बताई है। Deccan Chronicle के मुताबिक़ उसने कहा कि उद्योग के अनुमान से इस पर सालाना क़रीब ₹20,000 करोड़ लगते हैं, और इसके लिए सिर्फ़ बजट की मदद नहीं, कमाई का मॉडल चाहिए।
क्या तय है, क्या अभी बाक़ी?
तय है: फ़ीस का रेट, छूट और 15 अक्टूबर की तारीख़। जनवरी 2020 से UPI पर कोई MDR नहीं था, क्योंकि 2007 के पेमेंट क़ानून की धारा 10A ऐसे चार्ज रोकती थी। इस साल यह क़ानून बदला और फ़ीस का रास्ता खुला:
- 4 अगस्त: धारा 10A बदलने वाला बिल लोकसभा में पेश हुआ।
- 6 और 10 अगस्त: पहले लोकसभा, फिर राज्यसभा ने बिल पास किया।
- 17 अगस्त: राष्ट्रपति ने मंज़ूरी दी।
- 14 सितंबर: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना, ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं।
- 15 सितंबर: NPCI ने 0.4% का ढाँचा जारी किया।
- 28 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ीस पर रोक लगाने से मना किया; केस जारी है।
अभी बाक़ी: व्यापारियों की माँगों पर फ़ैसला, और सुप्रीम कोर्ट का केस। 30 सितंबर को CAIT के महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई में क़रीब 20 व्यापारी नेता दिल्ली में वित्त मंत्री से मिले। माँग थी कि त्योहारों को देखते हुए फ़ीस टाली जाए, और छोटे दुकानदारों की छूट-सीमा ₹1 लाख महीने से बढ़ाकर ₹5 लाख की जाए।
बैठक के बाद वितरकों के संगठन AICPDF और मोबाइल दुकानदारों के संगठन AIMRA ने 2 अक्टूबर का 'नो UPI डे' वापस ले लिया। उनका कहना है कि उन्हें भरोसा मिला कि बात पर विचार होगा।
हर संगठन पीछे नहीं हटा। Free Press Journal के मुताबिक़ 2 अक्टूबर को देश में कई जगह व्यापारियों ने 'नो UPI डे' मनाया। इसका आह्वान रिटेल व्यापारियों के संगठन FRTWA ने किया था। FRTWA का दावा है कि गुजरात, महाराष्ट्र और मुंबई महानगर क्षेत्र के क़रीब 250 व्यापारी संगठन इसमें शामिल हुए। कानपुर में भी यही हुआ। अमर उजाला के मुताबिक़ भीतरगांव, घाटमपुर, साढ़, कुड़नी, सजेती और पतारा के बाज़ारों में व्यापारियों ने स्कैनर पर टेप लगा दिया। आह्वान उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल का था।
Free Press Journal ने यह भी बताया कि इंडियन बैंक दुकानदारों से अपने हिस्से की फ़ीस न लेने पर विचार कर रहा है, पर अभी फ़ैसला नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चल रहा है। वकील अंजन दत्ता ने जनहित याचिका (PIL) में 14 सितंबर की अधिसूचना, NPCI के ढाँचे और बदली हुई धारा 10A को चुनौती दी है। 28 सितंबर को चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने केंद्र, RBI और NPCI से 4 हफ़्ते में जवाब माँगा। पर केस चलने तक फ़ीस पर रोक लगाने से बेंच ने मना कर दिया। अगली सुनवाई की तारीख़ अभी किसी रिपोर्ट में नहीं है।
सरकार ने कोई माँग मानी हो, ऐसा 2 अक्टूबर तक की किसी रिपोर्ट में नहीं है। फ़िलहाल फ़ीस 15 अक्टूबर से ही लागू होनी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर ग्राहक को फ़ीस देनी होगी?
नियम में नहीं। MDR दुकानदार भरता है, और वित्त मंत्री ने कहा है कि यह फ़ीस ग्राहकों पर नहीं डाली जाएगी। सरकार ने बैंकों से भी कहा है कि दुकानदार इसे ग्राहक पर न डालें। पर LocalCircles के मुताबिक़ अभी यह नहीं बताया गया कि कोई दुकानदार फिर भी फ़ीस वसूले, तो उस पर क्या जुर्माना लगेगा या ग्राहक को पैसा कैसे लौटेगा।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने UPI फ़ीस पर रोक लगाई है?
नहीं। 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI से 4 हफ़्ते में जवाब माँगा, पर केस चलने तक फ़ीस पर रोक लगाने से मना कर दिया। केस अभी चल रहा है, और फ़ीस 15 अक्टूबर से लागू होनी है।
दोस्त या घरवालों को UPI से पैसे भेजने पर चार्ज लगेगा?
नहीं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे गए पैसे पर कोई MDR नहीं है, रक़म कितनी भी हो।
छोटी दुकानों पर UPI पेमेंट का क्या होगा?
जिन छोटे दुकानदारों को QR कोड से महीने में ₹1 लाख तक UPI पेमेंट मिलते हैं, वे कोई फ़ीस नहीं देंगे, भले कोई एक पेमेंट ₹2,000 से बड़ा हो। व्यापारी यह सीमा ₹5 लाख करने की माँग कर रहे हैं; इस पर अभी फ़ैसला नहीं हुआ।
स्रोत
- PIB, Ministry of Finance: UPI Continues to Remain Free for Peer to Peer Transactions and 96% of Merchant Transactions
- IBEF (reproduction of the PIB release): UPI continues to remain free for P2P transactions and 96% of merchant transactions
- LocalCircles: UPI MDR consumer survey and impact estimate
- LocalCircles: UPI merchant survey
- Deccan Chronicle: NPCI announces 0.4% merchant charge on UPI payments above ₹2,000
- Business Today: UPI MDR of 0.4% on transactions above ₹2,000 from October 15, what you need to know
- Moneylife: UPI transactions above ₹2,000 could face MDR as govt redraws no-charge rule
- ThePrint: Can UPI transactions be charged? What Centre's new taxation bill means for users, merchants
- Telangana Today (PTI): Lok Sabha passes bill enabling government to allow MDR on UPI digital payments
- Inc42: Parliament clears taxation bill; FM re-assures no MDR on P2P UPI payments
- Deccan Chronicle: Taxation, Payment and Settlement Systems Act amendments get President's assent
- The Federal (PTI): Centre to ensure merchants don't charge customers UPI MDR
- ThePrint (PTI): MDR on UPI payments above ₹2,000 will not be passed on to consumers, govt sources
- Outlook Business (ANI): Banks to ensure merchants don't pass UPI MDR costs to consumers
- Outlook Money: UPI MDR, banks to monitor merchants as Centre plans mechanism to protect consumers
- Outlook Business (PTI): Proposed UPI MDR not a tax, cess or surcharge, will not burden consumers: FM
- The Pioneer (PTI): Sitharaman says proposed UPI MDR not a tax
- Telangana Today (PTI): UPI MDR is not a tax or surcharge, says Nirmala Sitharaman
- Business Today: No UPI Day withdrawn after traders meet FM Sitharaman over proposed MDR
- Goodreturns: No UPI Day protest called off after traders meet Sitharaman; 0.4% MDR still set for October 15
- News On Air (Prasar Bharati): Traders withdraw October 2 No UPI Day call after meeting Finance Minister
- Free Press Journal: No UPI Day, traders suspend digital payments over MDR
- अमर उजाला: कानपुर में 'नो यूपीआई डे', स्कैनर पर टेप
- Free Press Journal: UPI MDR relief, Indian Bank may waive charge on merchant payments above ₹2,000
- Outlook India: New UPI charges explained, who pays MDR and what remains free
- PRS Legislative Research: The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026
- LiveLaw: Supreme Court refuses to stay charges on UPI merchant transactions above ₹2,000
- ThePrint (PTI): SC refuses to stay MDR on UPI payments above Rs 2,000, issues notice to Centre