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RBI का फ़ैसला 7 अक्टूबर को: रेपो 0.25% बढ़ा तो EMI पर कितना असर

रेपो अभी 5.25% है। 0.25% बढ़ा तो ₹30 लाख के 20 साल के रेपो-लिंक्ड होम लोन की EMI करीब ₹469 बढ़ेगी (8.00% की उदाहरण दर पर)।

Sahir Shekhअपडेट:
कोलकाता में भारतीय रिज़र्व बैंक की इमारत पर लगी पट्टिका, जिस पर हिंदी, बांग्ला और अंग्रेज़ी में बैंक का नाम और पता लिखा है
फ़ोटो: Biswarup Ganguly / CC BY 3.0

3 लाइन में वजह।

क्या हुआ:
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 5 अक्टूबर से चल रही है और रेपो रेट पर फ़ैसला 7 अक्टूबर 2026 को आएगा। रेपो अभी 5.25% है।
क्यों:
Business Today के मुताबिक़ अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82% रही, जो RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर है, और कच्चा तेल महंगा हुआ है। इसलिए कई अर्थशास्त्री 0.25% बढ़ोतरी की संभावना बता रहे हैं।
आप पर असर:
रेपो 0.25% बढ़ा तो ₹30 लाख के 20 साल के रेपो-लिंक्ड होम लोन पर EMI करीब ₹469 बढ़ सकती है (8.00% उदाहरण दर)। नई दर आपके लोन की रीसेट तारीख़ से लगेगी।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 5 अक्टूबर से चल रही बैठक के बाद 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट पर फ़ैसला बताएगी। रेपो अभी 5.25% है और कई बैंक और अर्थशास्त्री 0.25% बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं। ऐसा हुआ तो यह फ़रवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी होगी।

8.00% की उदाहरण दर पर, रेपो से जुड़े ₹30 लाख के 20 साल के होम लोन की EMI इससे हर महीने करीब ₹469 बढ़ जाएगी।

रेपो 0.25% बढ़ा तो EMI कितनी बढ़ेगी?

हिसाब के लिए एक होम लोन लेते हैं: ₹30 लाख, 20 साल यानी 240 EMI, और 8.00% सालाना ब्याज। 8.00% सिर्फ़ उदाहरण की दर है, किसी बैंक की असली दर नहीं। अपने लोन के लिए अपनी दर रखकर अंदाज़ा लगाएँ।

ब्याज दर

हर महीने EMI

8.00% के मुक़ाबले

8.00% (उदाहरण)

₹25,093

—

8.25% (रेपो 0.25% ऊपर)

₹25,562

₹469 ज़्यादा

8.50% (रेपो 0.50% ऊपर)

₹26,035

₹942 ज़्यादा

8.25% पर हर महीने के ₹469 जुड़कर 20 साल में करीब ₹1.12 लाख हो जाते हैं। 8.50% वाली लाइन उस हालत के लिए है जब दिसंबर में भी 0.25% बढ़े, जैसा HSBC का अनुमान है और SBI Research ने सुझाव दिया है।

दूसरा रास्ता यह है कि EMI ₹25,093 ही रहे और लोन लंबा चले। तब 8.25% पर करीब 12 EMI, यानी लगभग 1 साल ज़्यादा लगेगा।

यह गणित शुरू से पूरी अवधि पर नई दर मानकर है। जिनका लोन कुछ साल चल चुका है, उन पर असर बचे हुए मूलधन और बची अवधि के हिसाब से अलग होगा।

EMI बढ़ी तो कब से लागू होगी?

रेपो बढ़ते ही अगली क़िस्त नहीं बदल जाती। बीच में तीन कदम हैं:

  1. RBI रेपो बढ़ाए। यह फ़ैसला 7 अक्टूबर को आएगा।
  2. बैंक अपना रेपो-लिंक्ड रेट बदले। पिछली बार इसमें देर नहीं लगी: 5 दिसंबर 2025 की कटौती के बाद बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने अपना BRLLR 8.15% से घटाकर 7.90% किया, जो 6 दिसंबर से लागू हुआ (PTI)।
  3. आपके लोन की रीसेट तारीख़ आए। RBI के ब्याज दर नियमों के मुताबिक़ एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े लोन की दर कम से कम हर तीन महीने में एक बार रीसेट होनी चाहिए।

RBI ने अगस्त 2026 में नए नियमों का ड्राफ़्ट भी जारी किया है: रीसेट की अवधि बैंक चुनेगा, पर तीन महीने से ज़्यादा नहीं। यह अभी सिर्फ़ ड्राफ़्ट है और इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है।

किन लोन पर सीधा असर पड़ेगा?

RBI के नियमों के मुताबिक़ फ़्लोटिंग रेट वाले रिटेल लोन, जैसे होम और ऑटो लोन, और MSME के फ़्लोटिंग लोन किसी एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। यह बेंचमार्क RBI का रेपो रेट हो सकता है, 3 या 6 महीने के ट्रेज़री बिल की यील्ड, या FBIL का कोई और बेंचमार्क। इनमें जो लोन रेपो से जुड़े हैं, उन पर असर सबसे सीधा पड़ता है।

पुराने MCLR या बेस रेट वाले लोन पूरे चुकने या रिन्यू होने तक उसी व्यवस्था पर चलते रहेंगे। MCLR बैंक का अपना बेंचमार्क है, जो उसके फ़ंड जुटाने की लागत से तय होता है। इसकी रीसेट अवधि एक साल या उससे कम रखी जाती है, जबकि एक्सटर्नल बेंचमार्क वाले लोन की दर कम से कम हर तीन महीने में रीसेट होनी चाहिए।

रेपो का बदलाव लोन तक पहुँचता है, यह पिछली कटौतियों में दिखा। RBI गवर्नर के अगस्त के बयान के मुताबिक़ फ़रवरी 2025 से जून 2026 के बीच नए रुपया लोन पर औसत उधार दर (WALR) 0.80% और पहले से चल रहे लोन पर 0.91% घटी।

EMI बढ़े तो आपके पास क्या रास्ते हैं?

RBI के अगस्त 2023 के सर्कुलर के मुताबिक़ ब्याज दर रीसेट के समय उधार लेने वाले को ये विकल्प दिए जाने हैं:

  • EMI बढ़वाना, लोन की अवधि बढ़वाना, या दोनों का मेल
  • लोन के दौरान कभी भी पूरा या कुछ हिस्सा पहले चुका देना (प्रीपेमेंट)

इसी सर्कुलर में फ़िक्स्ड रेट पर जाने का विकल्प बैंक की बोर्ड से मंज़ूर पॉलिसी पर छोड़ा गया है। EMI या अवधि बढ़ने की जानकारी तुरंत देनी है, और हर तिमाही के आख़िर में एक स्टेटमेंट भी, जिसमें मूलधन, ब्याज, EMI, बची EMI की संख्या और सालाना ब्याज दर लिखी हो।

आपका बैंक अभी इनमें से कौन-से विकल्प देता है, यह उससे पक्का कर लें।

बढ़ोतरी की बात अब क्यों हो रही है?

RBI ने आख़िरी बार 8 फ़रवरी 2023 को रेपो 0.25% बढ़ाकर 6.50% किया था। 2025 में कुल 1.25% की कटौती हुई; आख़िरी कटौती 5 दिसंबर 2025 को 5.50% से 5.25% की थी। उसके बाद अब तक की चारों बैठकों में दर नहीं बदली, और अगस्त में कमेटी ने एक राय से इसे 5.25% पर रखा, रुख न्यूट्रल रहा।

Business Standard हिंदी की रिपोर्ट बढ़ोतरी के पीछे चार दबाव गिनाती है: बॉन्ड यील्ड का बढ़ना, कमज़ोर रुपया, महंगा होता कच्चा तेल और महंगाई। अमर उजाला ने कच्चे तेल और महंगाई के जोखिम को वजह बताया है।

Business Today के मुताबिक़ अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) 4.82% रही, जबकि जुलाई में 4.45% थी। खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई 5.95% और थोक महंगाई 9.92% पर पहुँच गई। RBI का लक्ष्य मध्यम अवधि में 4% महंगाई का है।

कच्चे तेल पर गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त के बयान में बताया था कि ब्रेंट क्रूड जून के आख़िर के स्तर से 34.5% ऊपर जा चुका है। अमर उजाला के मुताबिक़ 5 अक्टूबर को ब्रेंट करीब 101 डॉलर प्रति बैरल पर था। हालाँकि गवर्नर ने उसी बयान में यह भी कहा था कि दबाव मुख्य रूप से खाने और ईंधन की सप्लाई से है, और महंगाई अभी चौतरफ़ा नहीं फैली।

अर्थशास्त्री क्या कह रहे हैं?

राय बँटी हुई है। Business Standard हिंदी के मुताबिक़ SBI Research मानता है कि 0.25% बढ़ोतरी का जोखिम अब काफ़ी बढ़ गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट कहती है कि SBI Research ने अक्टूबर और दिसंबर, दोनों बैठकों में 0.25-0.25% बढ़ोतरी का सुझाव दिया है।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने भी अक्टूबर में 0.25% बढ़ोतरी की संभावना बताई है (अमर उजाला)। HSBC की चीफ़ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी अक्टूबर और दिसंबर में दो बढ़ोतरी का अनुमान लगा रही हैं; उनके हिसाब से रेपो 5.75% तक जाएगा। दूसरी तरफ़ India Ratings & Research का अनुमान था कि RBI अक्टूबर में दरें नहीं बदलेगा (Business Today)।

ये सब अनुमान हैं। फ़ैसला 7 अक्टूबर को आएगा। MPC की अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर 2026 को है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रेपो रेट बढ़ा तो क्या अगले ही महीने EMI बढ़ जाएगी?

ज़रूरी नहीं। पहले बैंक अपना रेपो-लिंक्ड रेट बदलता है, फिर आपके लोन की रीसेट तारीख़ पर नई दर लगती है। RBI नियम के मुताबिक़ यह रीसेट कम से कम हर तीन महीने में एक बार होता है।

क्या EMI की जगह लोन की अवधि बढ़वा सकते हैं?

RBI के अगस्त 2023 के सर्कुलर के मुताबिक़ रीसेट के समय EMI बढ़ाने, अवधि बढ़ाने या दोनों का विकल्प दिया जाना है, और लोन का पूरा या कुछ हिस्सा पहले चुकाने का भी। आपका बैंक अभी कौन-से विकल्प देता है, यह उससे पक्का कर लें।

MCLR वाले पुराने लोन पर क्या असर होगा?

RBI के नियमों के मुताबिक़ पुराने MCLR लोन पूरे चुकने या रिन्यू होने तक उसी व्यवस्था पर चलते रहेंगे। MCLR बैंक का अपना बेंचमार्क है, जो उसके फ़ंड जुटाने की लागत से तय होता है। इसकी रीसेट अवधि एक साल या उससे कम होती है, जबकि रेपो-लिंक्ड लोन की दर कम से कम हर तीन महीने में रीसेट होनी चाहिए।

स्रोत

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