मुख्य सामग्री पर जाएँ
वजह न्यूज़
ऑटो

FASTag से ग़लत या दो बार कटा टोल: 40 दिन में शिकायत, रिफंड का पूरा रास्ता

शिकायत अपने FASTag बैंक या 1033 पर करें; Kotak 35 दिन के बाद सिर्फ़ सद्भावना के आधार पर सुनता है, बात न बने तो 1915 और ज़िला उपभोक्ता आयोग।

Sahir Shekhअपडेट:
नेशनल हाईवे 66 पर सास्थान टोल प्लाज़ा, लेन से गुज़रती कार और ट्रक
फ़ोटो: Adityamadhav83 / CC BY 4.0

3 लाइन में वजह।

क्या हुआ:
FASTag से ग़लत या दो बार कटे टोल की शिकायत IHMCL के मुताबिक़ 40 दिन में करनी होती है; सरकार के मुताबिक़ 2024 में 12.55 लाख ट्रांज़ैक्शन में पैसा लौटाना पड़ा।
क्यों:
टोल एजेंसी के कर्मचारी कभी हाथ से ग़लत गाड़ी नंबर डाल देते हैं, और रीडर एक ही टैग को एक से ज़्यादा बार पढ़ लेता है।
आप पर असर:
SMS आते ही अपने FASTag बैंक या 1033 पर शिकायत करें; Kotak 35 दिन तक शिकायत लेता है, उसके बाद सिर्फ़ सद्भावना के आधार पर। हल न निकले तो 1915 हेल्पलाइन और ज़िला उपभोक्ता आयोग जा सकते हैं।

FASTag से टोल ग़लत कटा है, या एक बार टोल पार करने पर दो बार कटा है, तो पैसा वापस मिल सकता है। बस शिकायत में देर न करें: कटौती का SMS देखते ही अपने FASTag बैंक के कस्टमर केयर या 1033 हेल्पलाइन पर शिकायत करें।

IHMCL यानी NHAI की टोल-मैनेजमेंट कंपनी, जो FASTag सिस्टम चलाती है। उसके FAQ के मुताबिक़ कंपनी के कॉल सेंटर (1033) पर शिकायत 40 दिन तक की जा सकती है, पैसा कटने की तारीख़ से। Kotak Mahindra Bank 35 दिन की सीमा रखता है। उसके बाद वह शिकायत सिर्फ़ सद्भावना के आधार पर देखता है।

ऐसी ग़लती कम होती है, पर गिनती लाखों में है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 20 मार्च 2025 को लोकसभा में लिखित जवाब में NPCI के आंकड़े रखे: 2024 के 410 करोड़ FASTag ट्रांज़ैक्शन में से 12.55 लाख में ग़लत कटौती का पैसा लौटाना पड़ा, यानी 0.03%।

पैसा ग़लत क्यों कटता है?

लोकसभा के उसी जवाब में दो वजहें बताई गईं। पहली, टोल एजेंसी का कर्मचारी हाथ से ट्रांज़ैक्शन बनाते समय ग़लत गाड़ी नंबर डाल देता है और टोल किसी दूसरे के टैग से कट जाता है। दूसरी, रीडर एक ही टैग को एक से ज़्यादा बार पढ़ लेता है।

ETV Bharat की 30 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़ क़रीब 35% मामलों में गाड़ी टोल प्लाज़ा पर थी ही नहीं। यानी घर के बाहर खड़ी कार के नाम पर भी कटौती का SMS आ सकता है।

ग़लती टोल एजेंसी की निकले तो उस पर जुर्माना भी लगता है। PTI के मुताबिक़ उसी जवाब में बताया गया कि कॉन्ट्रैक्ट के क्लॉज़ 15 के तहत यह जुर्माना ज़्यादा वसूली गई रकम का 30 से 50 गुना है। कुछ रिपोर्ट्स में ₹1 लाख जुर्माने की बात है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि हमें नहीं मिली।

रिफंड बैंक देता है, टोल प्लाज़ा नहीं

FASTag का पैसा उस बैंक के पास रहता है जिसने टैग जारी किया। टोल प्लाज़ा का बैंक अलग होता है। ग़लत कटौती पर आपका बैंक प्लाज़ा के बैंक से "चार्जबैक" मांगता है, और ग़लती साबित हो जाए तो पैसा आपके FASTag वॉलेट में लौटता है। शिकायत के दो रास्ते हैं: अपने FASTag बैंक का कस्टमर केयर, या 1033 हेल्पलाइन।

IHMCL के FAQ के मुताबिक़ चार्जबैक में आम तौर पर 20 से 30 कामकाजी दिन लगते हैं। Onmanorama की रिपोर्ट के मुताबिक़ टोल ऑपरेटर प्लाज़ा के CCTV फ़ुटेज से मिलान करता है; फ़ुटेज में आपकी गाड़ी न दिखे तो पैसा लौटा दिया जाता है।

शिकायत की समय-सीमा: 40 दिन या 35?

यहीं पेच है। IHMCL की 40 दिन की सीमा उसके अपने कॉल सेंटर पर शिकायत के लिए है। बैंक की सीमा बैंक के पेज पर देखनी होगी, और Kotak Mahindra Bank का हेल्प पेज 35 दिन बताता है। उसके मुताबिक़ इस अवधि में उठाया गया ₹1,000 तक का विवाद 2 कामकाजी दिन में लौटा दिया जाता है और पूरा निपटारा 20 दिन में होता है। 35 दिन बीतने के बाद बैंक शिकायत को सिर्फ़ सद्भावना के आधार पर देखता है।

सीधा हिसाब: छोटी सीमा मान कर चलें, और अपने बैंक के FASTag पेज पर उसकी समय-सीमा एक बार देख लें।

Kotak एक और बात साफ़ लिखता है। रिफंड के बाद टोल प्लाज़ा का बैंक उस रकम पर दोबारा दावा करे, तो वह आपके वॉलेट से फिर कट सकती है। इसलिए पैसा लौटने के बाद भी शिकायत नंबर और कागज़ संभाल कर रखें।

शिकायत से पहले क्या तैयार रखें?

  • ट्रांज़ैक्शन ID
  • पैसा कटने की तारीख़ और समय
  • गाड़ी का नंबर
  • कटौती का SMS या बैंक स्टेटमेंट
  • RC की साफ़ स्कैन कॉपी और गाड़ी की फ़ोटो (Kotak ये मांगता है)

शिकायत कहां करें: पूरी सीढ़ी

कदम

कहां

कब

ध्यान रखें

1 (क)

अपना FASTag बैंक: कस्टमर केयर या पोर्टल

ग़लत कटौती दिखते ही; Kotak में 35 दिन, उसके बाद सिर्फ़ सद्भावना के आधार पर

चार्जबैक में 20–30 कामकाजी दिन (IHMCL); Kotak में ₹1,000 तक 2 कामकाजी दिन

1 (ख)

1033 हेल्पलाइन (MoRTH, NHAI, IHMCL)

ग़लत कटौती दिखते ही; IHMCL के FAQ के मुताबिक़ कॉल सेंटर पर 40 दिन के भीतर

टोल प्लाज़ा की दिक़्क़तें भी: टैग न पढ़ा जाना, FASTag लेने से इनकार, ब्लैकलिस्ट विवाद, मंथली पास

2

नेशनल कंज़्यूमर हेल्पलाइन 1915

बैंक या 1033 से हल न निकले

सुबह 8 से रात 8 बजे; WhatsApp +918800001915; 17 भाषाएं

3

ज़िला उपभोक्ता आयोग

मामला बनने के 2 साल के भीतर

₹50 लाख तक के मामले; ₹5 लाख से कम पर कोई फ़ीस नहीं

IHMCL की वेबसाइट पर बड़े बैंकों के FASTag कस्टमर केयर नंबर दिए गए हैं।

बैंक

नंबर

SBI

1800-110-018

HDFC Bank

1800-120-1243

ICICI Bank

1800-210-0104

Axis Bank

1860-419-8585

Airtel Payments Bank

400/8800-688-006

Kotak Mahindra Bank

18-602-666-888

आप पर असर: तीन आम हालात

एक क्रॉसिंग, दो SMS। रीडर ने टैग दो बार पढ़ लिया। दोनों ट्रांज़ैक्शन ID के साथ अपने बैंक में शिकायत करें। यह सीधा चार्जबैक का मामला है।

गाड़ी घर पर थी, टोल कट गया। ऐसे मामलों की मुख्य वजह गाड़ी का नंबर हाथ से ग़लत डालना है। शिकायत के साथ गाड़ी की फ़ोटो, RC और उस दिन का SMS दें। CCTV मिलान में आपकी गाड़ी न दिखे तो पैसा लौटता है।

कर्मचारी ने कहा टैग नहीं चला, नकद लिया, फिर टैग से भी कटा। 15 नवंबर 2025 से नियम है कि बिना वैध FASTag वाली गाड़ी नकद में दोगुनी फ़ीस देगी और UPI से 1.25 गुना। मान लीजिए टोल ₹100 है। कर्मचारी कहता है कि टैग नहीं पढ़ा गया और आपसे ₹200 नकद ले लेता है। थोड़ी देर बाद SMS आता है कि टैग से भी ₹100 कट गए। यानी ₹100 के टोल पर आपके ₹300 गए। टैग से कटी रकम के लिए बैंक में शिकायत करें, और प्लाज़ा पर टैग न पढ़े जाने की शिकायत 1033 पर।

बैंक से बात न बने तो क्या करें?

बैंक या 1033 से रिफंड न मिले, तो नेशनल कंज़्यूमर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। यह फ़ोन 1915 के अलावा WhatsApp, पोर्टल, NCH ऐप और UMANG ऐप से भी दर्ज होती है।

इसके बाद ज़िला उपभोक्ता आयोग का रास्ता है। अमर उजाला की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक़ पानीपत के ज़िला उपभोक्ता आयोग ने 29 सितंबर को ऐसे ही एक मामले में फ़ैसला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक़ दो बार टोल वसूलने और रिफंड न देने पर आयोग ने टोल प्लाज़ा और कंस्ट्रक्शन कंपनी से शिकायतकर्ता को कुल ₹6,800 दिलाने का आदेश दिया। इस आदेश की पुष्टि हम किसी दूसरे स्रोत से नहीं कर सके।

उपभोक्ता आयोग में शिकायत मामला बनने के 2 साल के भीतर करनी होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FASTag से ग़लत कटे पैसे की शिकायत कितने दिन में करनी होती है?

IHMCL के FAQ के मुताबिक़ उसके कॉल सेंटर (1033) पर ट्रांज़ैक्शन की तारीख़ से 40 दिन के भीतर। Kotak Mahindra Bank 35 दिन की सीमा बताता है, उसके बाद वह शिकायत सिर्फ़ सद्भावना के आधार पर देखता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके शिकायत करें।

रिफंड कितने दिन में आता है?

IHMCL के मुताबिक़ चार्जबैक में आम तौर पर 20 से 30 कामकाजी दिन लगते हैं। Kotak 35 दिन के भीतर उठाए गए ₹1,000 तक के विवाद 2 कामकाजी दिन में लौटाने की बात कहता है।

बैंक रिफंड न दे तो क्या करें?

बैंक या 1033 से हल न निकले तो नेशनल कंज़्यूमर हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत करें। उसके बाद ज़िला उपभोक्ता आयोग का रास्ता है: शिकायत मामला बनने के 2 साल के भीतर, और ₹5 लाख से कम पर कोई फ़ीस नहीं।

स्रोत

WhatsAppTelegramX